नई दिल्ली — संघीय सरकार ने मंगलवार को घोषणा की कि 2027-28 के वित्तीय वर्ष के लिए सकल उधारी ₹15.99 लाख करोड़ तक सीमित रखी जाएगी, जो पहले के लगभग ₹16.5 लाख करोड़ के अनुमान से कम है। वित्त मंत्रालय के एक प्रकाशन में विस्तृत इस कदम का उद्देश्य बाजार उधारी को नियंत्रित करना और संप्रभु बांडों की औसत अवधि बढ़ाना है, अधिकारियों ने कहा।
नीति का विवरण
वित्त मंत्रालय ने बताया कि संशोधित लक्ष्य के तहत बाजार उधारी ₹15.99 लाख करोड़ तक सीमित रहेगी, जबकि वित्तीय अधिशेष और अन्य गैर-बाजार स्रोतों के माध्यम से आंतरिक वित्तपोषण मौजूदा योजना के अनुसार जारी रहेगा। मंत्रालय ने कर्ज की परिपक्वता अवधि बढ़ाने की रणनीति भी प्रस्तुत की, जिसका लक्ष्य दस वर्ष से अधिक परिपक्व होने वाले बांडों का हिस्सा बढ़ाकर रोलओवर जोखिम को कम करना है।
वित्तीय पृष्ठभूमि
FY26 के लिए सरकार ने ₹16.3 लाख करोड़ की सकल उधारी दर्ज की, जिसमें से लगभग ₹12.5 लाख करोड़ बाजार उधारी थी। FY27 के लिए वित्तीय घाटा GDP के 5.5% पर प्रक्षेपित है, जो FY26 के 5.7% लक्ष्य से थोड़ा कम है। मंत्रालय के मध्यम अवधि के वित्तीय ढांचे के अनुसार कर्ज‑से‑GDP अनुपात लगभग 68% पर स्थिर रहने की उम्मीद है।
बाजार की प्रतिक्रिया
घोषणा के बाद बांड यील्ड में हल्की गिरावट आई। 10‑वर्षीय सरकारी बांड की यील्ड पिछले दिन के 6.85% से घटकर 6.78% हो गई, जैसा कि द इकोनॉमिक टाइम्स ने रिपोर्ट किया। एक प्रमुख ब्रोकरिज के विश्लेषकों ने नोट किया कि उधारी सीमा में कमी संप्रभु वक्र पर दबाव कम कर सकती है, परंतु राजस्व घाटे से लाभ को संतुलित किया जा सकता है।
आधिकारिक टिप्पणी
वित्त मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने पत्रकारों को बताया कि ऋण कटौती सरकार की व्यापक ऋण‑स्थिरता रणनीति के अनुरूप है और FY26 के पहले आधे में राजस्व संग्रह में सुधार को दर्शाती है। प्रवक्ता ने यह भी जोड़ा कि ऋण परिपक्वता को बढ़ाने से वार्षिक ऋण सेवा लागत कम होगी और पूंजीगत व्यय के लिए अधिक वित्तीय स्थान उपलब्ध होगा।
वित्तीय समेकन पर प्रभाव
निम्न ऋण लक्ष्य सरकार को अपनी वित्तीय स्थिति कड़ी करने के लिए मजबूर करेगा, चाहे वह गैर‑कर राजस्व बढ़ाकर हो, कर अनुपालन सुधारकर हो, या गैर‑प्राथमिक व्यय को सीमित करके। मंत्रालय ने संकेत दिया कि वह उच्च आर्थिक प्रतिफल वाले बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को प्राथमिकता देगा और कम प्रभाव वाले योजनाओं को स्थगित करेगा।
आगे की चुनौतियाँ
वित्तीय समेकन अभी भी अप्रत्यक्ष कर आधार के प्रदर्शन और वस्तु एवं सेवा कर (GST) सुधारों के कार्यान्वयन पर निर्भर है। न्यू इंडियन एक्सप्रेस रिपोर्ट में उद्धृत विश्लेषकों ने चेतावनी दी कि निजी निवेश में किसी भी मंदी से वित्तीय घाटे पर दबाव पड़ सकता है, जिससे आगे समायोजन आवश्यक हो सकते हैं।
दृष्टिकोण
संशोधित ऋण आंकड़ा 2027 के प्रारंभिक फरवरी में प्रस्तुत होने वाले संघीय बजट में परिलक्षित होगा। पर्यवेक्षक यह देखेंगे कि क्या सरकार अतिरिक्त बाजार ऋण के बिना FY27 के घाटे के लक्ष्य को पूरा कर सकती है।
प्राथमिक स्रोत एवं आधिकारिक दस्तावेज़
- India to Reduce FY27 Gross Borrowing to ₹15.99 Lakh Crore
- Govt to cut FY27 gross borrowing to Rs 15.99 lakh crore – The New Indian Express
- INDIA REDUCES GROSS BORROWING FOR FY27 AT 16 TRILLION RUPEES – news.cgtn.com
- Centre cuts FY27 market borrowing to Rs 15.99 lakh crore; targets longer debt maturity – T