नई दिल्ली — केंद्र ने NEET‑SS सीटों पर नई नीति की घोषणा की है, जिससे आगामी प्रवेश चक्र के लिए अतिरिक्त सीटें खोली जाएँगी, जैसा कि 27 सितंबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा लिया गया यह निर्णय देश भर में स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा तक पहुँच बढ़ाने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है।
नीति विवरण और कार्यान्वयन समय‑सीमा
नई निर्देशिका के अनुसार राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड (NBE) अतिरिक्त सीटों के आवंटन के लिए जिम्मेदार होगा, जो 2024 NEET‑SS ढाँचे में निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुरूप होगा। ये सीटें 2027‑28 शैक्षणिक वर्ष के लिए उपलब्ध कराई जाएँगी, तथा पहली बैच के अभ्यर्थियों से अपेक्षा है कि वे प्रारम्भिक 2027 में परीक्षा देंगे। यह नीति भारत के राजपत्र में प्रकाशित की जाएगी और अगले शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से प्रभावी होगी।
विस्तार का दायरा
हालाँकि सटीक सीटों की संख्या अभी तक प्रकट नहीं की गई है, मंत्रालय ने पुष्टि की है कि यह विस्तार विभिन्न विशेषताओं को सम्मिलित करेगा, जिनमें आंतरिक चिकित्सा, शल्य चिकित्सा, बाल रोग और प्रसूति‑स्त्री
पक्षकारों की प्रतिक्रियाएँ
देशभर के छात्र संगठनों ने इस निर्णय का स्वागत किया है, जिसमें वे बढ़ते NEET-SS अभ्यर्थियों की संख्या को समायोजित करने के लिए अधिक सीटों की आवश्यकता का हवाला दे रहे हैं। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने उल्लेख किया कि इस विस्तार से मौजूदा सीटों पर पड़ने वाले दबाव में कमी आ सकती है और पोस्टग्रेजुएट प्रशिक्षण की समग्र गुणवत्ता में सुधार हो सकता है।
दूसरी ओर, कई चिकित्सा महाविद्यालयों ने नई सीटों को अपनी मौजूदा बुनियादी ढाँचे में समाहित करने से जुड़े लॉजिस्टिक चुनौतियों के बारे में चिंता व्यक्त की है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने एक विस्तृत कार्यान्वयन योजना की मांग की है, जिसमें शिक्षक भर्ती, छात्रावास सुविधाएँ और क्लिनिकल प्रशिक्षण सुविधाओं को संबोधित किया जाए।
भविष्य की गतिविधियाँ और निगरानी
मंत्रालय ने संकेत दिया है कि यह नई सीटों के कार्यान्वयन की निगरानी NBE, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के प्रतिनिधियों से मिलकर बनाए गए एक संयुक्त कार्यबल के माध्यम से करेगा। कार्यबल आवंटन प्रक्रिया की तिमाही समीक्षा करेगा और मंत्रालय को सुधारात्मक कार्रवाई के लिए किसी भी समस्या की रिपोर्ट करेगा।
इसके अलावा, अतिरिक्त सीटों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने और आवंटन प्रक्रिया को पारदर्शी रखने के लिए जनरल ऑडिटर ऑफ इंडिया (CAG) द्वारा इस नीति की नियमित समीक्षा की जाएगी।