नई दिल्ली — सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक सार्वजनिक हित मुकदमे को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जिसमें स्कूलों में बुलिंग और रैगिंग को रोकने के लिए केंद्रीय कानून की मांग की गई थी। यह याचिका माता-पिता और शिक्षा कार्यकर्ताओं के गठबंधन द्वारा दायर की गई थी, जिसमें तर्क दिया गया कि मौजूदा नियमों से छात्रों को परिसर में उत्पीड़न और शारीरिक दुरुपयोग से पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिलती।
निर्णय से वर्तमान ढाँचे में कोई बदलाव नहीं
28 सितंबर 2026 को जारी आदेश में कहा गया कि याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सार्वजनिक हित मुकदमे के मानदंडों को पूरा नहीं करती है। इसमें यह भी उल्लेख किया गया कि शिक्षा मंत्रालय ने पहले ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत रैगिंग से निपटने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं, और ये दिशानिर्देश पूरे देश के स्कूलों में लागू किए जा रहे हैं।
रैगिंग से जुड़ी पृष्ठभूमि
रैगिंग, एक प्रकार की बुलिंग है जिसमें मनोवैज्ञानिक धमकी, शारीरिक हमला या सामाजिक बहिष्कार शामिल हो सकता है, यह भारतीय शैक्षणिक संस्थानों में लंबे समय से एक समस्या रही है। 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय को एक व्यापक एंटी‑रैगिंग नीति जारी करने का निर्देश दिया, जिसे बाद में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में शामिल किया गया। इस नीति के तहत स्कूलों को एंटी‑रैगिंग समितियाँ स्थापित करनी, जागरूकता कार्यक्रम संचालित करने और घटनाओं की सूचना राष्ट्रीय एंटी‑रैगिंग समिति को देने की आवश्यकता है।
याचिका के तर्क
याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि मौजूदा दिशानिर्देश लागू करने योग्य नहीं हैं और एक वैधानिक कानून अपराधियों के लिए अधिक सशक्त निरोधक उपाय और स्पष्ट दंड प्रदान करेगा। उन्होंने हाल ही में हुई गंभीर रैगिंग घटनाओं का उल्लेख किया, जिनमें छात्रों को चोटें आईं और मृत्यु हुई, और तर्क दिया कि ऐसा कानून ऐसी त्रासदियों को रोकने में सहायक होगा।
सर्वोच्च न्यायालय का तर्क
अपने संक्षिप्त बयान में, न्यायालय ने कहा कि याचिका ने कोई नया कानूनी प्रश्न प्रस्तुत नहीं किया और वर्तमान ढांचा रैगिंग से निपटने के लिए पर्याप्त है। न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि मंत्रालय ने प्रवर्तन को सुदृढ़ करने के लिए पहले ही कदम उठाए हैं, जिसमें स्कूलों में एंटी‑रैगिंग अधिकारियों की नियुक्ति और एक डिजिटल रिपोर्टिंग पोर्टल का परिचय शामिल है।
स्कूलों और अभिभावकों के लिए निहितार्थ
हालांकि न्यायालय का निर्णय मौजूदा दिशानिर्देशों में परिवर्तन नहीं करता, यह राष्ट्रीय एंटी‑रैगिंग समिति के निर्देशों के अनुपालन के लिए स्कूलों की आवश्यकता पर बल देता है। अभिभावकों और छात्र संगठनों से घटनाओं की शीघ्र रिपोर्ट करने तथा स्कूल‑व्यापी एंटी‑रैगिंग पहलों में भाग लेने का आग्रह किया गया है। शिक्षा मंत्रालय ने अनुपालन की निगरानी और आवश्यकतानुसार नीतियों में संशोधन करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
प्राथमिक स्रोत एवं आधिकारिक दस्तावेज़
- Supreme Court refuses to entertain PIL for Central law, guidelines to curb ragging in scho
- SC refuses to entertain plea seeking law to curb bullying, ragging in schools – indiatoday
- Supreme Court Refuses to Stay Rajasthan Cricket Association Elections; Directs Results Not
- SC refuses to entertain PIL for Central law, guidelines to curb ragging in schools – ET Ed