बैंगलोर — कर्नाटक ने डॉ. एम. कस्तुरीरंगन की पश्चिमी घाटों के संरक्षण पर विस्तृत रिपोर्ट को खारिज कर दिया है, जिससे स्थानीय निवासियों और पर्यावरणविदों में तीव
राज्य के वन मंत्री आर. एस. रेड्डी ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि सरकार “क्षेत्र की सामाजिक-आर्थिक वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए सिफारिशों की समीक्षा करेगी।” विज्ञप्ति में यह भी उल्लेख किया गया कि सरकार “कोई भी निर्णय लेने से पहले हितधारकों से परामर्श करेगी।”
सामुदायिक प्रतिक्रिया और कानूनी कार्रवाई
कोलार जिले के निवासियों ने कर्नाटक उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि राज्य की कार्रवाई करने से इनकार करने की नीति वन संरक्षण अधिनियम, 1980 का उल्लंघन है। याचिका में दावा किया गया है कि सुरक्षात्मक उपायों की कमी के कारण पिछले दशक में वन क्षेत्र में 12 प्रतिशत की गिरावट आई है।
पर्यावरण समूहों ने भी सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है, जहां उन्होंने ईएसए (पर्यावरण संरक्षण अधिनियम) दिशानिर्देशों को लागू करने के लिए आपातकालीन निर्देश जारी करने की मांग की है। याचिका में 2023 के सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले का हवाला दिया गया है, जिसने पश्चिमी घाट में “कटाई-मुक्त” नीति की आवश्यकता को मजबूत किया था।
जैव विविधता और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
विशेषज्ञों का चेतावनी है कि पश्चिमी घाट, जो 5,000 से अधिक पौधों और 1,000 से अधिक जानवरों के प्रजातियों का घर है, अनियंत्रित खनन, सड़क निर्माण और पर्यटन से खतरों का सामना कर रहा है। इस क्षेत्र के जल संसाधन कर्नाटक, गोवा और महाराष्ट्र में 30 मिलियन से अधिक लोगों की आपूर्ति करते हैं।
अर्थशास्त्रियों का तर्क है कि संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाया जाना चाहिए। भारतीय प्रबंधन संस्थान, बेंगलुरु के एक वरिष्ठ अर्थशास्त्री ने कहा, “इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर्यटन और कृषि दोनों पर निर्भर है, लेकिन अनियंत्रित शोषण दीर्घकालिक नुकसान का कारण बन सकता है।”
आगामी कदम
राज्य सरकार ने रिपोर्ट के निष्कर्षों पर चर्चा करने के लिए पर्यावरण गैर-सरकारी संगठनों और स्थानीय नेताओं के साथ 10 अक्टूबर को एक बैठक निर्धारित की है। इस बीच, पर्यावरण विभाग ने एक सार्वजनिक परामर्श अवधि की घोषणा की है, जो 31 अक्टूबर तक चलेगी, जिसमें प्रस्तावित ईएसजेड (पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र) पर टिप्पणियों का आमंत्रण दिया गया है।
जैसे ही बहस जारी है, निवासी और पर्यावरणविद तत्काल सुरक्षात्मक उपायों की अपनी मांग पर अडिग हैं, जबकि सरकार आर्थिक विकास को ध्यान में रखते हुए एक संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दे रही है।
प्राथमिक स्रोत एवं आधिकारिक दस्तावेज़
- Western Ghats protection: Section of residents, environmentalists counter Karnataka politi
- Environmentalists warn against delaying ESA protection – Bangalore Mirror
- Protecting Western Ghats: K’taka seeks a ground survey, environmentalists back eco-zone |
- Western Ghats protection takes a back seat as Karnataka rejects Kasturirangan report – Dec