Rajasthan HC warns Jaipur may lose UNESCO status if repairs delayed

High Court orders state to submit remedial plan for heritage sites by December, citing structural decay and unauthorized construction in the Pink City.
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जयपुर — राजस्थान उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कड़ी चेतावनी जारी की कि यदि राज्य सरकार दिसंबर 2026 तक अपने ऐतिहासिक संरचनाओं के लिए व्यापक सुधारात्मक उपाय लागू नहीं करती है, तो जयपुर शहर अपनी यूनेस्को विश्व धरोहर स्थिति खोने के जोखिम में है

राज्य सरकार की प्रतिक्रिया

राजस्थान सरकार ने, अपने संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के माध्यम से, न्यायालय की चिंताओं को स्वीकार किया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि विश्व धरोहर क्षेत्र के भीतर सभी धरोहर संरचनाओं की स्थिति का मूल्यांकन करने के लिये एक कार्यबल गठित किया गया है। कार्यबल से अपेक्षा है कि वह अक्टूबर के अंत तक अपनी प्रारम्भिक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा, तथा पूर्ण सुधार योजना दिसंबर तक न्यायालय को सौंपेगा।

राज्य ने यह भी संकेत दिया है कि वह सतत रखरखाव ढाँचा तैयार करने हेतु भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और अंतरराष्ट्रीय संरक्षण विशेषज्ञों से तकनीकी सहायता प्राप्त करेगा। इसमें आधुनिक अग्नि सुरक्षा उपकरणों की स्थापना, महत्वपूर्ण स्मारकों की संरचनात्मक स्थिरीकरण, तथा धरोहर क्षेत्र में कड़े निर्माण नियमों का प्रवर्तन शामिल है।

कानूनी प्रभाव एवं भविष्य के कदम

युनेस्को ने पहले कई भारतीय धरोहर स्थलों को अपने विश्व धरोहर जोखिम सूची में शामिल किया है, जिसमें शहरी विस्तार, प्रदूषण और अपर्याप्त प्रबंधन जैसी समस्याओं का उल्लेख किया गया है। यदि जयपुर को इस सूची में जोड़ा जाता है, तो अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहायता और तकनीकी समर्थन की वापसी हो सकती है, जिससे संरक्षण प्रयास और जटिल हो जाएंगे।

न्यायालय का आदेश भारत में सांस्कृतिक धरोहर के शासन में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप माना गया है। यह विश्व धरोहर स्थलों के संरक्षण में न्यायिक निगरानी का एक precedent स्थापित करता है, जिससे राज्य सरकारों को उनकी संरक्षक जिम्मेदारियों के लिये उत्तरदायी ठहराया जाता है। न्यायमंडल ने अनुपालन न करने पर विशिष्ट दंडों के संबंध में अपना निर्णय स्थगित रखा, यह कहा कि वह राज्य की सुधार योजना की समीक्षा के बाद आगे के उपायों का

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