नई दिल्ली — कल्चर मंत्रालय ने 26 सितंबर 2026 को घोषणा की कि मध्य प्रदेश की तीन लोक परंपराओं को राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर (ICH) सूची में शामिल किया गया है, जिससे देश के जीवित सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के कैटलॉग का विस्तार होता है और राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर प्रकाश डाला जाता है। यह जोड़ उसी दिन मंत्रालय द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में पुष्टि की गई, जिसमें राष्ट्रीय सांस्कृतिक धरोहर संस्थान को अनुमोदन संस्था के रूप में उद्धृत किया गया।
तीन परंपराएँ मान्यता प्राप्त
नई जोड़ी गई परंपराएँ मध्य भारत के ग्रामीण और आदिवासी समुदायों में निहित हैं। आधिकारिक घोषणा में परंपराओं के नाम नहीं बताए गए, परंतु यह बताया गया कि ये नृत्य, संगीत और शिल्प के विशिष्ट रूपों का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिन्हें पीढ़ियों से मौखिक और प्रशिक्षुता के माध्यम से प्रेषित किया गया है। मंत्रालय ने उल्लेख किया कि प्रत्येक परंपरा राष्ट्रीय ICH दिशानिर्देशों में उल्लिखित प्रामाणिकता, निरंतरता और सामुदायिक
सरकारी प्रतिक्रिया और सामुदायिक प्रतिक्रियाएँ
इस घोषणा का स्वागत सांस्कृतिक विद्वानों और स्थानीय अभ्यासियों ने किया है। राज्य के संस्कृति विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा कि इन परंपराओं को शामिल करने से गोंड और भिल समुदायों की अमूर्त विरासत की रक्षा होगी, जिन्होंने लंबे समय से दूरदराज के गाँवों में इन प्रथाओं को बनाए रखा है। मंत्रालय ने यह भी उल्लेख किया कि अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (ICH) सूची में शामिल होने से राज्य की अन्य सांस्कृतिक प्रथाओं के लिए यूनेस्को की मान्यता प्राप्त करने की प्रयासों को बढ़ावा मिलेगा।
भविष्य की गतिविधियाँ और निगरानी
मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार, ICH पंजीकरण का समीक्षा वार्षिक आधार पर की जाती है। राज्य को प्रत्येक परंपरा की वर्तमान स्थिति, अभ्यासियों की संख्या और ज्ञान स्थानांतरण के तंत्रों सहित दस्तावेज़ीकरण जमा करने की आवश्यकता होगी। मंत्रालय ने राष्ट्रीय संस्कृति विरासत संस्थान के साथ साझेदारी की घोषणा भी की है, जिसके तहत क्षेत्रीय सर्वेक्षण किए जाएंगे और डिजिटल अभिलेखागार विकसित किए जाएंगे।
व्यापक राष्ट्रीय महत्व
मध्य प्रदेश की परंपराओं को राष्ट्रीय ICH सूची में शामिल करने से पहले देश भर में इसी प्रकार की कई मान्यताएँ दी जा चुकी हैं। इस वर्ष के शुरुआती दौर में राजस्थान ने एक पारंपरिक बुनाई तकनीक और तमिलनाडु ने एक शास्त्रीय नृत्य रूप को सूची में जोड़ा था। ये जोड़ देश की विविध अमूर्त विरासत को तेजी से शहरीकरण और सांस्कृतिक एकसमानता के सामने संरक्षित करने पर बढ़ते जोर को दर्शाते हैं।