India’s 2026 Elections Face Unprecedented Scrutiny Amid Allegations of Irregularities

International observers and domestic critics point to technology glitches, political polarization and a series of legal challenges as reasons for heightened scrutiny of India’s upcoming elections.
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वॉशिंगटन — भारत के 2026 के आम चुनाव पिछले चक्रों की तुलना में अभूतपूर्व जांच का सामना कर रहे हैं, अल जज़ीरा और याहू की रिपोर्टों के अनुसार। विश्लेषकों का कहना है कि यह ध्यान तकनीकी‑संबंधी चिंताओं, कानूनी चुनौतियों और राजनीतिक ध्रुवीकरण में वृद्धि के संयोजन से उत्पन्न हो रहा है, जिसने भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) से अधिक पारदर्शिता की माँग को प्रज्वलित किया है।

बहस के केंद्र में प्रौद्योगिकी

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें (ईवीएम) 1999 से प्रत्येक चुनाव में उपयोग की जा रही हैं, परन्तु हालिया खराबी की घटनाएँ और छेड़छाड़ के आरोप उनकी विश्वसनीयता पर प्रश्न उठाते हैं। अल जज़ीरा के लेख में बताया गया है कि 2024 के उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के राज्य चुनावों में तकनीकी गड़बड़ियों की एक श्रृंखला ने ईसीआई को पुनरावलोकन करने के लिए प्रेरित किया। तब से आयोग ने कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में बायोमेट्रिक प्रमाणी

अंतर्राष्ट्रीय पर्यवेक्षक और तुलनात्मक संदर्भ

साम्यवादी राष्ट्रमण्डल और यूरोपीय संघ के अंतर्राष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने चुनाव प्रक्रिया की निगरानी में रुचि व्यक्त की है। अल जज़ीरा की रिपोर्ट में साम्यवादी राष्ट्रमण्डल की चुनावी निरीक्षण टीम के एक बयान का हवाला दिया गया है, जिसमें कहा गया है कि वह “अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूपता सुनिश्चित करने हेतु चुनावी ढाँचे की बारीकी से जाँच करेगी।” टीम की उपस्थिति से बाहरी उत्तरदायित्व की एक अतिरिक्त परत जुड़ने की उम्मीद है।

चुनाव आयोग द्वारा उठाए गए कदम

ईसीआई ने बढ़ती चिंताओं को दूर करने के लिए कई उपायों की घोषणा की है। इन उपायों में सभी ईवीएमों का सार्वजनिक ऑडिट, मतदान अधिकारियों के लिए नया प्रशिक्षण कार्यक्रम, तथा नागरिक समाज और न्यायपालिका के प्रतिनिधियों से गठित एक स्वतंत्र निरीक्षण समिति की स्थापना शामिल है। आयोग का यह भी इरादा है कि चुनाव के 30 दिनों के भीतर ऑडिट के निष्कर्षों पर विस्तृत रिपोर्ट जारी की जाए।

मतदाता विश्वास पर प्रभाव

मतदाता विश्वास ईसीआई के लिए एक प्रमुख सूचक रहा है। एक प्रमुख सर्वेक्षण एजेंसी द्वारा हाल ही में किए गए सर्वे में पता चला कि पिछले चुनाव में केवल 58 % मतदाताओं ने मतदान प्रक्रिया में “पूरी तरह से भरोसा” महसूस किया। इस सर्वेक्षण के परिणामों को विपक्षी नेताओं ने चुनावी प्रणाली में त्वरित सुधारों की आवश्यकता के प्रमाण के रूप में उद्धृत किया है। ईसीआई ने इन सर्वेक्षण डेटा को अपने सुधारों के मार्गदर्शन के लिए उपयोग करने का संकल्प लिया है।

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