बेंगलुरु — कर्नाटक की युवा प्रतिनिधि टीम ने शंघाई में आयोजित 2026 विश्व कौशल प्रतियोगिता में पदक जीता, जो इस कार्यक्रम के इतिहास में राज्य के लिए पहली बार है। यह उपलब्धि राज्य में व्यावसायिक शिक्षा के बढ़ते महत्व को रेखांकित करती है और कर्नाटक सरकार द्वारा लागू किए गए कौशल विकास ढाँचे को उजागर करती है।
विश्व कौशल 2026: तकनीकी प्रतिभा का वैश्विक मंच
अंतर्राष्ट्रीय कौशल संघ (IFS) ने 12 से 20 सितंबर तक चीन के शंघाई में विश्व कौशल प्रतियोगिता का 2026 संस्करण आयोजित किया। इस कार्यक्रम में 70 देशों के 1,200 से अधिक प्रतिभागियों ने 30 तकनीकी और रचनात्मक शैलियों में प्रतिस्पर्धा की। यह प्रतियोगिता द्विवार्षिक रूप से आयोजित होती है और संयुक्त राष्ट्र द्वारा इसे युवा वर्ग के लिए कौशल विकास और रोजगार अवसरों को बढ़ावा देने के मंच के रूप में मान्यता प्राप्त है।
कर्नाटक की भागीदारी और प्रदर्शन
कर्नाटक प्रतिनिधिमंडल, जो कठोर राज्य‑स्तरीय चयन प्रक्रिया के माध्यम से चुना गया था, पाँच शैलियों में 18 प्रतिभागियों से मिलकर बना, जिसमें ऑटोमोबाइल प्रौद्योगिकी, रोबोटिक्स
कर्नाटक के कौशल पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव
विशेषज्ञों का कहना है कि यह पदक कर्नाटक के व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों की दृश्यता को बढ़ाएगा। राज्य 2023 से कर्नाटक कौशल विकास मिशन (KSDM) में निवेश कर रहा है, जिसका उद्देश्य 5,00,000 से अधिक युवाओं को उद्योग‑उन्मुख प्रशिक्षण प्रदान करना है। 2026 विश्व कौशल के परिणाम से निजी कंपनियों से और निवेश आकर्षित होने की उम्मीद है, जो स्थानीय प्रशिक्षण केंद्रों के साथ सहयोग करना चाहती हैं।
अंतरराष्ट्रीय संदर्भ और तुलनाएँ
भारत का समग्र प्रदर्शन शंघाई कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों में तीन पदकों के साथ रहा, जिसमें कर्नाटक का रजत पदक एकल राज्य प्रतिनिधिमंडल के लिए सबसे ऊँची उपलब्धि के रूप में उभरा। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने कुल पाँच पदक अर्जित किए, जिनमें विद्युत इंजीनियरिंग और यांत्रिक डिजाइन में दो स्वर्ण पदक शामिल हैं। ये परिणाम कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय प्रगति को वैश्विक मानकों के साथ तुलना करने के लिए उपयोग किए जा रहे हैं।
कर्नाटक के युवाओं के लिए अगले कदम
प्रतियोगिता के बाद, कर्नाटक सरकार प्रमुख शहरों में कार्यशालाओं की एक श्रृंखला आयोजित करने की योजना बना रही है, ताकि विश्व कौशल प्रतिभागियों से सर्वोत्तम प्रथाएँ साझा की जा सकें। कार्यशालाएँ उभरती हुई प्रौद्योगिकियों जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नवीकरणीय ऊर्जा पर केंद्रित होंगी, जिन्हें राज्य की आर्थिक योजना में उच्च‑विकास वाले क्षेत्रों के रूप में पहचाना गया है।