नई दिल्ली — भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली को अपने संकाय के कौशल और एआई‑प्रेरित अर्थव्यवस्था की मांगों के बीच बढ़ता अंतराल का सामना करना पड़ रहा है, यह सोमवार को द हिन्दू में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया। यह लेख, एक Accredited Wire प्रेषण पर आधारित, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और संबंधित क्षेत्रों में शिक्षकों की भर्ती व प्रशिक्षण के लिए एक समन्वित रणनीति की मांग करता है।
संकाय भर्ती में सुधार
लेख में बताया गया है कि देश भर के विश्वविद्यालय अभी भी पारंपरिक भर्ती प्रथाओं पर निर्भर हैं, जो उभरते विषयों में तकनीकी विशेषज्ञता से अधिक वरिष्ठता और शोध उत्पादन को प्राथमिकता देती हैं। यह तर्क दिया गया है कि यह मॉडल संस्थानों की क्षमता को सीमित करता है, जिससे वे ऐसे पाठ्यक्रम नहीं दे पाते जो वर्तमान नौकरी बाजार को प्रतिबिंबित करें, जहाँ एआई, डेटा विज्ञान और मशीन लर्निंग का महत्व निरन्तर बढ़ रहा है।
कमियों को दूर करने के लिए, रिपोर्ट राष्ट्रीय एआई संकाय पूल के निर्माण की सिफारिश करती है, जिसे शिक्षा मंत्रालय द्वारा प्रबंधित किया जाएगा। यह पूल उद्योग अनुभव और शैक्षणिक योग्यताओं वाले योग्य पेशेवरों का डेटाबेस रखेगा, जिससे विश्वविद्यालय शीघ्रता से रिक्तियों को भर सकें और ऐसे उम्मीदवारों को नियुक्त कर सकें जो अद्यतन पाठ्यक्रम प्रदान कर सकें।
मौजूदा स्टाफ का कौशल उन्नयन
नए नियुक्तियों के अतिरिक्त, लेख मौजूदा संकाय के व्यवस्थित कौशल उन्नयन की आवश्यकता पर बल देता है। यह उन विश्वविद्यालयों के उदाहरण देता है जिन्होंने प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ
पाठ्यक्रम में पुनर्गठन और उद्योग से जुड़ाव
‘द हिंदु’ की रिपोर्ट में पाठ्यक्रमों को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप करने की महत्वपूर्णता पर भी प्रकाश डाला गया है। इसमें ऐसे पायलट कार्यक्रमों का उल्लेख किया गया है जिनमें विश्वविद्यालयों ने अपने पाठ्यक्रमों में वास्तविक दुनिया के कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) प्रोजेक्ट्स को शामिल किया है, जिससे छात्रों को व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होता है और शिक्षकों को वर्तमान व्यावसायिक प्रथाओं से जुड़ाव बनाए रखने में सहायता मिलती है। रिपोर्ट में ऐसे सहयोग को प्रोत्साहित करने के लिए एक राष्ट्रीय ढांचे की मांग की गई है, जिसमें बौद्धिक संपदा अधिकारों और डेटा सुरक्षा के संबंध में स्पष्ट दिशानिर्देश शामिल हों।
नीति सुझाव
लेख में उल्लेखित प्रमुख नीतिगत प्रस्ताव निम्नलिखित हैं:
- भर्ती प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए एक केंद्रीय AI शिक्षक पंजीकरण प्रणाली की स्थापना।
- AI और संबंधित क्षेत्रों में शिक्षक विकास कार्यक्रमों के लिए सरकारी अनुदान प्रदान करना।
- विश्वविद्यालयों को उद्योग भागीदारों के साथ संयुक्त शोध केंद्रों की स्थापना के लिए प्रोत्साहित करना।
- शिक्षण पदों के लिए पात्रता मानदंडों में संशोधन कर स्पष्ट AI विशेषज्ञता को शामिल करना।
रिपोर्ट के अनुसार, इन उपायों से भारत को नवाचार को प्रेरित करने और वैश्विक ज्ञान अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने में सक्षम कार्यबल विकसित करने में सहायता मिलेगी।