नई दिल्ली — पंजाब में कांग्रेस के नेता 2027 राज्य विधानसभा चुनाव से पहले एकता बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं, परंतु आंतरिक विभाजन और नेतृत्व विवाद पार्टी की संभावनाओं पर
पार्टी की पंजाब कार्यसमिति की हालिया बैठक में वरिष्ठ नेताओं ने एक समेकित रणनीति के महत्व पर चर्चा की, जो पार्टी के राष्ट्रीय एजेंडा की माँगों को पंजाब के विशिष्ट सामाजिक‑आर्थिक संदर्भ के साथ संतुलित करती हो। समिति ने लोकसभा और राज्यसभा में पार्टी के निर्वाचित प्रतिनिधियों के प्रदर्शन की भी समीक्षा की, यह नोट किया कि राष्ट्रीय स्तर पर अधिक मजबूत उपस्थिति राज्य में पार्टी की छवि को सुदृढ़ कर सकती है।
निर्वाचन संभावनाएँ और चुनौतियाँ
विश्लेषकों का मानना है कि 2022 के चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन पंजाब में पार्टी के घटते प्रभाव की स्पष्ट याद दिलाता है। पार्टी का वोट शेयर 12.5 % तक गिर गया, जो 2017 में प्राप्त 27.5 % से उल्लेखनीय गिरावट है। पार्टी के नेतृत्व ने स्वीकार किया है कि इस प्रवृत्ति को उलटने के लिए एक व्यापक संगठनात्मक पुनर्गठन आवश्यक है।
चुनौतियों के बावजूद, पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने पुनरुत्थान की संभावनाओं को लेकर आशावाद व्यक्त किया है। पंजाब के लिए पार्टी के प्रवक्ता ने कहा, “पार्टी स्थानीय नेताओं के साथ निकट सहयोग करके जनता के तात्कालिक मुद्दों को सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है।” हालांकि, प्रवक्ता ने यह भी स्वीकार किया कि “आगे का मार्ग चुनौतियों से भरा है, जिन्हें सामूहिक प्रयास द्वारा निपटा जाना आवश्यक है।”
2027 के चुनाव की ओर दृष्टि
अगला पंजाब विधानसभा चुनाव मार्च 2027 में निर्धारित है। पार्टी की राज्य इकाई एक ऐसा अभियान तैयार कर