Mandeep K Bhandari named CBSE chairman, brings medical and administrative experience

IAS officer Mandeep K Bhandari, a former principal secretary in Jammu & Kashmir and MBBS gold‑medallist, takes charge of the Central Board of Secondary Education amid ongoing assessment reforms.
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नई दिल्ली — केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 24 सितंबर 2026 को आईएएस अधिकारी मंदीप के भंडारी को अपना अध्यक्ष नियुक्त किया है, यह जानकारी बोर्ड ने शुक्रवार को जारी किए गए एक सर्कुलर में दी। भंडारी, जिन्होंने एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की है और जिनकी चिकित्सा महाविद्यालय में स्वर्ण पदक विजेता की उपाधि है, निधि छिब्बर की जगह ले रहे हैं, जिनकी कार्यकाल अगस्त में समाप्त हुआ था। यह नियुक्ति उस समय की गई है जब बोर्ड इस वर्ष की शुरुआत में हुए पुनर्मूल्यांकन से जुड़े विवादों के बाद अपने मूल्यांकन प्रणाली को स्थिर करने की कोशिश कर रहा है।

व्यावसायिक पृष्ठभूमि

भंडारी ने 2005 बैच में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में प्रवेश किया और केंद्र तथा राज्यों में विभिन्न वरिष्ठ पदों पर कार्य किया है। सीबीएसई में अपने पदभार संभालने से पहले, वे जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपाल के प्रमुख सचिव थे, जहाँ उन्होंने केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन की देखरेख की और आपदा राहत कार्रवाइयों का समन्वय किया। उनके प्रशासनिक रिकॉर्ड में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में संयुक्त सचिव के रूप में और दिल्ली में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक के रूप में कार्यकाल शामिल है।

चिकित्सा योग्यता

अधिकांश वरिष्ठ शिक्षा अधिकारियों के विपरीत, भंडारी ने हिमाचल प्रदेश के एक सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय से एमबीबीएस की पढ़ाई की और 2002 में स्वर्ण पदक प्राप्त किया। बाद में उन्होंने जन स्वास्थ्य में मास्टर डिग्री की पढ़ाई की, जिसमें स्वास्थ्य प्रणाली प्रबंधन पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। बोर्ड ने उनके चिकित्सा प्रशिक्षण को स्कूल पाठ्यक्रमों में स्वास्थ्य जागरूकता को एकीकृत करने और महामारी से जुड़ी बाधाओं के प्रति बोर्ड के प्रतिक्रिया मार्गदर्शन के लिए एक संपदा के रूप में उद्धृत किया है।

नियुक्ति की पृष्ठभूमि

बोर्ड का यह निर्णय उस आलोचना की लहर के बाद आया है, जिसमें खुले स्कूल प्रबंधन (ओएसएम) विवाद और जून 2026 में दसवीं और बारहवीं कक्षा के हज़ारों छात्रों को प्रभावित करने वाले पुनर्मूल्यांकन विवाद के संभालने पर सवाल उठाए गए थे। अभिभावकों और स्कूलों ने शिकायत की कि बोर्ड के संशोधित मार्किंग स्कीम में पारदर्शिता की कमी है, जिसके परिणामस्वरूप कई राज्य शिक्षा विभागों ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिकाएं दायर कीं। इस जवाब में, सीबीएसई ने अपने मूल्यांकन नीतियों की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया और पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया की स्वतंत्र ऑडिट सहित एक श्रृंखला में सुधारों की घोषणा की, जिसमें एक नया ग्रेडिंग मैट्रिक्स शामिल है।

शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में, सरकार ने भंडारी के चयन के मुख्य कारणों के रूप में उनके “प्रशासनिक दक्षता का प्रदर्शन और स्वास्थ्य तथा शिक्षा क्षेत्रों दोनों की समझ” को उजागर किया। बयान में यह भी जोड़ा गया कि बोर्ड नए अध्यक्ष से “शासन को मजबूत करने, परीक्षाओं में न्याय सुनिश्चित करने और छात्रों के समग्र विकास को बढ़ावा देने” की उम्मीद रखता है।

प्रारम्भिक प्राथमिकताएँ

CBSE के सर्कुलर के अनुसार, भंडारी 1 अक्टूबर 2026 से बोर्ड की शैक्षणिक, प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों की पूर्ण जिम्मेदारी संभालेंगे। उनकी प्रारम्भिक एजेंडा में 2026‑27 शैक्षणिक वर्ष के लिए संशोधित मूल्यांकन ढांचे को अंतिम रूप देना, डिजिटल शिक्षण उपकरणों के रोलआउट को तेज करना, तथा बोर्ड के शिकायत निवारण तंत्र की समीक्षा करना शामिल है। उन्हें राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की बहु‑विषयक शिक्षण और स्वास्थ्य शिक्षा पर सिफारिशों के कार्यान्वयन की देखरेख का भी कार्य सौंपा गया है।

प्रतिक्रियाएँ

शिक्षा विश्लेषकों का कहना है कि भंडारी के चिकित्सा और प्रशासनिक अनुभव का संयोजन बोर्ड को विद्यालयों में स्वास्थ्य संबंधित चुनौतियों, जैसे मानसिक स्वास्थ्य समर्थन और पोषण कार्यक्रमों, से निपटने में सहायता कर सकता है। शिक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी, अनाम रहने की शर्त पर, ने कहा कि यह नियुक्ति बोर्ड के शासन में एक ताज़ा दृष्टिकोण लाने के प्रति “प्रतिबद्धता” का संकेत देती है।

राज्य शिक्षा विभागों ने इस कदम का स्वागत किया है, जहाँ कर्नाटक राज्य शिक्षा मंत्री ने कहा कि बोर्ड का नया नेतृत्व छात्रों, अभिभावकों और विद्यालयों के बीच विश्वास बहाल करने का “एक अवसर” प्रदान करता है।

हालाँकि, छात्र संघ सतर्क बने हुए हैं। ऑल इंडिया सेकेंडरी स्कूल स्टूडेंट्स यूनियन (AISSSU) ने एक बयान जारी किया, जिसमें बोर्ड से आग्रह किया गया कि लंबित शिकायतों पर शीघ्र कार्रवाई करे और किसी भी भविष्य के मूल्यांकन परिवर्तनों को पूर्व सूचना के साथ संप्रेषित करे।

भव

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