GST Council to Discuss Expanded Data Access and Rare‑Disease Tax Relief

The council slated for Thursday may open GST data to broader users and consider a tax concession for rare‑disease treatments, officials say.
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नई दिल्ली — जीएसटी परिषद 8 अक्टूबर, 2026, गुरुवार को बैठक करेगी, जिसमें कर डेटा पारदर्शिता और स्वास्थ्य देखभाल की कीमतों को नई दिशा देने वाले दो एजेंडा आइटम पर विचार किया जाएगा। एजेंडा से परिचित सूत्रों के अनुसार, परिषद शोध और नीति विश्लेषण के लिए जीएसटी लेनदेन डेटा तक पहुंच को विस्तारित करने के प्रस्ताव का परीक्षण करेगी, साथ ही दुर्लभ रोगों के दवाओं पर कर राहत देने की एक अलग सिफारिश पर भी विचार होगा।

वित्त मंत्री श्री जितेंद्र सिंह की अध्यक्षता में यह परिषद तिमाही आधार पर बैठक करके केंद्र और राज्यों के बीच के विवादों को सुलझाती है और देश के अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को परिष्कृत करती है। अपनी हालिया बैठक में, इस निकाय की ओर से वित्त मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए एक मसौदा प्रस्ताव पर समीक्षा करने की उम्मीद है, जिसके तहत चयनित सार्वजनिक नीति संस्थानों, शैक्षणिक निकायों और उद्योग संगठनों को एक सुरक्षित पोर्टल के माध्यम से अनामकृत (anonymised) जीएसटी डेटा तक पहुंच दी जाएगी।

विस्तृत डेटा साझाकरण पर विचार

वर्तमान ढांचे के तहत, जीएसटी डेटा अनुपालन निगरानी के लिए केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और कस्टम बोर्ड (सीबीआईसी) और एक सीमित संख्या में सरकारी एजेंसियों के साथ साझा किया जाता है। प्रस्तावित विस्तार एक स्तरीय पहुंच मॉडल (tiered access model) का निर्माण करेगा, जिसके तहत सत्यापित संस्थाओं को आर्थिक शोध, आपूर्ति श्रृंखला विश्लेषण और वित्तीय नीति मॉडलिंग के लिए समग्र लेनदेन डेटा डाउनलोड करने की अनुमति दी जाएगी। एक वरिष्ठ जीएसटी परिषद अधिकारी ने रिपोर्टरों को बताया कि इस कदम का उद्देश्य “करदाताओं की गोपनीयता की रक्षा करते हुए प्रमाण-आधारित नीति निर्माण को बढ़ावा देना” है।

उद्योग समूहों ने इस विचार का स्वागत किया है, यह नोट करते हुए कि उपभोग पैटर्न में रीयल-टाइम अंतर्दृष्टि पूर्वानुमान को बेहतर बना सकती है और आर्थिक संकेतकों में देरी को कम कर सकती है। भारतीय उद्योग संघ (सीआईआई) ने पहले ही सरकार से जीएसटी डेटा को अधिक सुलभ बनाने की अपील की है, यह तर्क देते हुए कि इससे व्यवसायों को इन्वेंटरी और कीमत निर्धारण को अधिक प्रभावी ढंग से योजनाबद्ध करने में मदद मिलेगी।

हालांकि, गोपनीयता के समर्थकों ने चेतावनी दी है कि किसी भी डेटा-साझाकरण तंत्र में मजबूत अनामकृत (anonymisation) सुरक्षा उपायों को शामिल किया जाना चाहिए। सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्रालय (मेइटी) को रिपोर्टिंग के अनुसार पोर्टल के तकनीकी विनिर्देशों, जिसमें एन्क्रिप्शन मानक और ऑडिट ट्रेल्स शामिल हैं, का मसौदा तैयार करने का कार्य सौंपा गया है।

दुर्लभ रोगों की दवाओं पर कर राहत

गुरुवार के एजेंडा का दूसरा आइटम दुर्लभ रोगों के इलाज में उपयोग की जाने वाली दवाओं, जिन्हें ऑर्फन ड्रग्स के रूप में भी जाना जाता है, पर कर छूट से संबंधित है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा वित्त मंत्रालय के समन्वय में तैयार किए गए इस प्रस्ताव में, ऐसी दवाओं पर जीएसटी दर को मानक 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने की मांग की गई है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के अनुसार, दुर्लभ रोगों से अनुमानित 70 लाख भारतीय प्रभावित हैं, और आवश्यक उपचारों में से कई उच्च लागत पर आयातित हैं। मंत्रालय द्वारा उद्धृत स्वास्थ्य‑नीति संक्षिप्तिका के अनुसार, जीएसटी भार को कम करने से खुदरा कीमतों में कई प्रतिशत अंक की कमी हो सकती है।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ माधुरी कुमार, जिनसे परिषद को संबोधित करने की उम्मीद है, ने पहले ही “जीवनरक्षक उपचारों तक किफायती पहुँच” की आवश्यकता पर प्रकाश डाला है। संक्षिप्तिका में कोई आधिकारिक उद्धरण उपलब्ध नहीं है, परंतु मंत्रालय के अधिकारियों ने संकेत दिया कि राहत केवल दुर्लभ स्थितियों के लिए राष्ट्रीय आवश्यक दवाओं की सूची (NLEM) में सूचीबद्ध दवाओं

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