नई दिल्ली — तुर्कमेनिस्तान की वायु रक्षा सूची में भारत के आकाश मिसाइल प्रणाली के आगमन से विस्तार हो रहा है, अधिकारियों ने सोमवार को पुष्टि की। इस कदम से घरेलू रूप से निर्मित, मध्यम दूरी की क्षमता का जोड़ हो रहा है, जो पहले से ही चीनी निर्मित रडार और सतह‑से‑वायु मिसाइलों को शामिल करती है, विश्लेषकों ने कहा।
तुर्कमेन रक्षा खरीद की पृष्ठभूमि
2015 से, तुर्कमेनिस्तान ने चीनी रक्षा उपकरणों पर भारी निर्भरता रखी है, जिसमें उसने HQ‑9 दीर्घ दूरी की सतह‑से‑वायु मिसाइलें, HQ‑16 मध्यम दूरी की प्रणालियाँ और संबंधित फायर‑कंट्रोल रडार खरीदे हैं। प्रमुख ऊर्जा मार्गों के साथ इस मध्य एशियाई राष्ट्र की रणनीतिक स्थिति ने आपूर्तिकर्ताओं को विविधित करने की नीति को प्रेरित किया है, ताकि किसी एक स्रोत पर अत्यधिक निर्भरता से बचा जा सके।
आकाश प्रणाली का विवरण
आकाश प्रणाली, भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित और भारत डायनामिक्स लिमिटेड द्वारा निर्मित, अधिकतम 30 किमी की दूरी प्रदान करती है और एक साथ कई हवाई लक्ष्यों को ट्रैक एवं निरस्त्र
रणनीतिक प्रभाव
आकाश प्रणाली के अतिरिक्त होने से तुर्कमेनिस्तान को एक बहुस्तरीय रक्षा वास्तुकला प्राप्त होगी। चीनी HQ-9 मिसाइलें उच्च-उचाई और लंबी दूरी के खतरों को निपटाने के लिए हैं, जबकि आकाश प्रणाली क्रूज़ मिसाइलों और अमान्यत उड़ान वाहनों (UAV) जैसे मध्यम-उचाई और छोटी दूरी के लक्ष्यों का प्रबंधन करेगी। रक्षा विश्लेषकों ने उल्लेख किया है कि विविध स्रोतों से प्राप्त इस फ्लीट से लॉजिस्टिक्स जटिल हो सकती है, लेकिन यह एक आपूर्तिकर्ता की सहायता श्रृंखला में बाधा आने पर पुनरावृत्ति (redundancy) भी प्रदान करता है।
क्षेत्रीय प्रतिक्रियाएँ
पड़ोसी देश ईरान और उज़्बेकिस्तान ने इस खरीदारी पर कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया है। हालाँकि, अशगाबाद में आयोजित क्षेत्रीय सुरक्षा मंचों में बढ़ती हवाई निगरानी गतिविधियों के बीच “संतुलित” वायु रक्षा क्षमताओं की आवश्यकता पर बल दिया गया है। भारत के विदेश मंत्रालय ने इस सौदे का स्वागत किया है, जिसे “तुर्कमेनिस्तान के साथ गहरे रणनीतिक साझेदारी की ओर एक कदम” के रूप में वर्णित किया गया है।
भविष्य की दृष्टि
रिपोर्ट defence.in के अनुसार, तुर्कमेनिस्तान अगले दो वर्षों में अतिरिक्त आकाश लॉन्चर प्राप्त करने की योजना बना रहा है। यह खरीदारी देश की वायु रक्षा कमांड और नियंत्रण नेटवर्क की निर्धारित अपग्रेडेशन से मेल खाती है, जिसमें भारतीय और चीनी सेंसरों को एक एकीकृत प्रणाली में शामिल किया जाएगा। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के सुझाव के अनुसार, यह सौदा स्वदेशी रूप से विकसित एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर और नौसैनिक तोपखाने प्रणालियों सहित भारतीय रक्षा निर्यात के लिए नए मार्ग खोल सकता है।