नई दिल्ली — 26 सितंबर 2026 को प्रकाशित एक साप्ताहिक रक्षा विवरण ने चेतावनी दी कि तेजस Mk1A और ज़ोरवार Mk1 लड़ाकू विमान कार्यक्रमों में देरी भारत की संचालन तैयारी को कमजोर कर रही है। फर्स्टपोस्ट द्वारा जारी इस रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि तेजस कार्यक्रम ने बार-बार उत्पादन संबंधी बाधाओं का सामना किया है, और रूस के साथ संयुक्त उद्यम के रूप में विकसित ज़ोरवार परियोजना अभी तक श्रृंखला उत्पादन (serial production) में प्रवेश नहीं कर पाई है। इस विवरण में नोट किया गया है कि घरेलू, उच्च-प्रदर्शन वाले लड़ाकू विमान की कमी से भारतीय वायु सेना (IAF) को महत्वपूर्ण मिशनों के लिए पुराने विमानों और विदेशी प्लेटफॉर्मों पर निर्भर रहना पड़ सकता है।
अमेरिकी F-35 विमान IAF के साथ उड़ान भरते हैं, अग्नि-V बंकर-बस्टर का विकास जारी
इस विवरण में यह भी रिपोर्ट किया गया कि अमेरिकी F-35 लड़ाकू विमानों ने IAF के साथ संयुक्त प्रशिक्षण व्यायाम शुरू कर दिए हैं, जो भारतीय-अमेरिकी रक्षा संबंधों में गहराई के संकेत देता है। पश्चिमी सेक्टर में किए गए इन संयुक्त उड़ानों का उद्देश्य दोनों वायु सेनाओं के बीच आपसी अंतःक्रियात्मकता (interoperability) को बेहतर बनाना और संचालन अनुभव साझा करना है। रिपोर्ट में यह भी जोड़ा गया कि अग्नि-V मिसाइल, जो एक लंबी दूरी की, बंकर-नष्ट करने वाली प्रणाली है, परीक्षण के अंतिम चरणों में है और आने वाले वर्षों में सेवा में शामिल होने की उम्मीद है। अग्नि-V का विकास क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के सामने रणनीतिक विरोध (strategic deterrence) बनाए रखने के लिए भारत की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
घरेलू लड़ाकू विमानों की देरी के अलावा, इस विवरण ने फार्नबोर रक्षा प्रदर्शनी (Farnborough Defence Exhibition) पर भी कवरेज दिया, जहां डिफेंस वन ने एक व्यापारिक संक्षेप (business brief) की रिपोर्ट की जिसमें कई प्रमुख रुझानों पर प्रकाश डाला गया। इस संक्षेप में उल्लेख किया गया कि भारत के रक्षा आपूर्ति (procurement) में संयुक्त उद्यमों और तकनीक स्थानांतरण समझौतों की ओर एक बदलाव देखा गया है, जिसमें स्वदेशी उत्पादन क्षमताओं को बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इसमें भारतीय कंपनियों की ओर से विदेशी साझेदारों से उन्नत अंतरिक्ष और मिसाइल तकनीकों को प्राप्त करने में बढ़ते रुचि को भी उजागर किया गया है।
फर्स्टपोस्ट के विवरण के अनुसार, तेजस Mk1A कार्यक्रम तकनीकी समस्याओं और आपूर्ति श्रृंखला (supply-chain) की बाधाओं के संयोजन के कारण देरी से प्रभावित हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया कि कार्यक्रम की मूल समय-सीमा, जिसका लक्ष्य 2024 तक श्रृंखला उत्पादन शुरू करना था, को 2028 तक टाल दिया गया है। इस देरी का IAF के विमान बेड़े की संरचना पर प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि तेजस को प्रमुखी रेखा (frontline) पर पुराने MiG-21 और MiG-29 विमानों को बदलने के लिए तैयार किया गया है। विवरण में यह भी जोड़ा गया कि ज़ोरवार Mk1, जो एक मध्यम ऊंचाई और लंबी अवधि (long-endurance) वाला लड़ाकू विमान है, को रूसी रक्षा मंत्रालय से उत्पादन लाइसेंस अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है, जिससे इसकी सेवा में प्रवेश की प्रक्रिया और धीमी हो गई है।
रिपोर्ट ने यह भी उजागर किया कि भारतीय वायु सेना के साथ उड़ान भर रहे अमेरिकी F‑35 विमान व्यापक इंडो‑अमेरिकी रक्षा सहयोग ढांचे का हिस्सा हैं। इंडो‑अमेरिकी संयुक्त वायु अभ्यास (IJAEX) के अंतर्गत आयोजित संयुक्त अभ्यासों का उद्देश्य सामरिक समन्वय को सुदृढ़ करना और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना है। इस संदेश में कहा गया कि F‑35 की उन्नत सेंसर प्रणाली और स्टेल्थ क्षमताएँ भारतीय वायु सेना की परिचालन प्रभावशीलता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने की आशा रखती हैं।
रणनीतिक निरोधक क्षमता के क्षेत्र में, संदेश ने बताया कि अग्नि‑V मिसाइल ने सफल परीक्षण उड़ानों की एक श्रृंखला पूरी की है। यह मिसाइल, जो परमाणु पेलोड वहन कर सकती है और 5,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर सकती है, भारत की द्वितीय‑प्रहार क्षमता का प्रमुख तत्व बनायी जा रही है। रिपोर्ट ने यह भी जोड़ा कि अग्नि‑V की बंकर‑ध्वंस क्षमता कड़े लक्ष्य को निरस्त करने के लिए अभिप्रेत है, जिससे संभावित प्रतिद्वंद्वियों के विरुद्ध भारत की निरोधक स्थिति में मजबूती आती है।
डिफेंस वन द्वारा रिपोर्ट किए गए फ़ार्नबरो रक्षा ब्रीफ़ ने भारत की रक्षा खरीद रणनीति में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौतों के महत्व को रेखांकित किया। इस ब्रीफ़ में बताया गया कि भारत ने यूरोपीय और अमेरिकी कंपनियों के साथ कई समझौते किए हैं, जिससे उन्नत विमान इंजन, एवियोनिक्स और मिसाइल प्रणालियों का अधिग्रहण किया जा सके। रिपोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि भारतीय सरकार विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करने के लिए संयुक्त विकास परियोजनाओं को सक्रिय