जयपुर — राजस्थान उच्च न्यायालय ने गुरुवार को एक स्वतः संज्ञान (सुओ मोटो) आदेश जारी करते हुए चेतावनी दी कि यदि दिसंबर तक सुधारात्मक उपाय नहीं अपनाए जाते हैं, तो जयपुर को अपनी यूनेस्को विश्व विरासत स्थिति खोने का खतरा है। पीठ ने जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) और जयपुर नगर निगम को 15 दिसंबर तक ऐतिहासिक दीवारों से घिरे शहर की स्थिति और संबंधित विरासत स्थलों पर एक व्यापक रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया, जिसमें शहरी संरचना के क्षय, अवैध कब्जे और अनुमति के बिना निर्माण के प्रति चिंता व्यक्त की गई है।
न्यायालय का आदेश और प्रक्रियात्मक चरण
न्यायालय के नागरिक अधिकार क्षेत्र के तहत दर्ज किए गए इस आदेश में, दोनों एजेंसियों को शहर के ऐतिहासिक परिधि के भीतर स्थित सभी चार यूनेस्को सूचीबद्ध स्थलों की स्थिति को कवर करने वाली एक स्थिति रिपोर्ट प्रदान करने का निर्देश दिया गया है। पीठ ने राज्य के पुरातत्व और संग्रहालय विभाग को इस मूल्यांकन में सहायता प्रदान करने का भी अनुरोध किया है। न्यायालय ने उल्लेख किया है कि अनुपालन में विफलता यूनेस्को द्वारा समीक्षा को प्रेरित कर सकती है, जिसके परिणामस्वरूप ‘ऐतिहासिक शहर जयपुर’ को विश्व विरासत सूची से हटा दिया जा सकता है।
जयपुर की विरासत स्थिति का पृष्ठभूमि
जयपुर का ऐतिहासिक दीवारों से घिरा शहर, जंतर मंतर प्रेक्षगृह के साथ, 2019 में राजपूत और मुगल प्रभावों की वास्तुकलात्मक संयोजन और उत्कृष्ट शहरी योजना के लिए यूनेस्को विश्व विरासत सूची में दर्ज किया गया था। इस दर्ज होने के बाद से, विरासत कार्यकर्ताओं ने तेजी से शहरीकरण, अवैध संरचनाओं और संरक्षण मानकों के अनुपालन की अपर्याप्तता के बारे में चिंता व्यक्त की है।
कानूनी संदर्भ और पूर्वानुमान
उच्च न्यायालय की यह हस्तक्षेप उन कई पूर्व निर्णयों के बाद आया है, जिनमें भारतीय न्यायालयों ने राज्य सरकारों को विरासत स्थलों की रक्षा के लिए निर्देश दिए थे। 2022 में, सर्वोच्च न्यायालय ने संस्कृति मंत्रालय को भारतीय कई स्मारकों के लिए यूनेस्को दिशानिर्देशों के अनुपालन की निगरानी करने का निर्देश दिया था। राजस्थान का यह आदेश उन पूर्वानुमानों के अनुरूप है, जो सांस्कृतिक संपदाओं की सुरक्षा में न्यायपालिका की भूमिका पर जोर देते हैं।
संभावित प्रभाव
यदि यूनेस्को यह तय करता है कि शहर के विरासत मूल्यों से समझौता हुआ है, तो वह “खतरे की सूची” चेतावनी जारी कर सकता है या अत्यधिक मामलों में स्थल को सूची से हटा सकता है। ऐसी स्थिति पर्यटन राजस्व, संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तपोषण और शहर की वैश्विक प्रतिष्ठा को प्रभावित करेगी।
अधिकारियों की प्रतिक्रियाएँ
जैडए ने एक बयान जारी किया जिसमें उसने बताया कि वह अनुरोधित डेटा एकत्र करेगा और उल्लंघनों की पहचान होने पर सुधारात्मक कार्यवाही शुरू करेगा। नगरपालिका निगम ने कहा कि वह न्यायालय के निर्देश के साथ सहयोग करेगा और विरासत क्षेत्र में अनधिकृत निर्माणों की सर्वेक्षण कार्यवाही पहले ही शुरू कर चुका है।
आगे के कदम
दोनों एजेंसियों से अपेक्षा है कि वे न्यायालय द्वारा निर्धारित समय सीमा तक अपने रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगी। उच्च न्यायालय ने 2027 के प्रारम्भिक जनवरी में एक अनुवर्ती सुनवाई तय की है ताकि निष्कर्षों की समीक्षा की जा सके और यह तय किया जा सके कि आगे के आदेश आवश्यक हैं या नहीं। विरासत समूहों ने राज्य से कड़ी ज़ोनिंग विनियम अपनाने और अवैध निर्माण गतिविधियों के लिए दंड बढ़ाने का आग्रह किया है।