लंदन — मंगलवार को नई दिल्ली में संसद मार्ग के बाहर प्रदर्शनकारियों द्वारा चुनाव आयोग के प्रमुख ग्यानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के बीच, पुलिस ने एक विरोध प्रदर्शन भंग किया और एक वरिष्ठ विपक्षी नेता को पुलिस बस में खींचकर ले गई। इस घटना का वीडियो रिकॉर्ड किया गया और कई समाचार संस्थानों द्वारा इसकी रिपोर्टिंग की गई, जिससे विपक्षी दलों की ओर से निंदा की गई और अंतरराष्ट्रीय प्रेक्षकों में भारत में लोकतांत्रिक विरोध की स्थिति के प्रति चिंता व्यक्त की गई।
प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई
मंगलवार की सुबह, सैकड़ों विपक्षी समर्थक संसद परिसर के निकट एकत्र हुए, जहां उन्होंने नारेबाजी की और प्लेकार्ड दिखाए, जिनमें आगामी आम चुनावों में पक्षपाती पूर्वाग्रह के आरोप में चुनाव आयोग प्रमुख के हटाने की मांग की गई थी। यह प्रदर्शन दिल्ली पुलिस द्वारा निर्धारित सुरक्षा अभ्यास के साथ मेल खाता था, जिसके कारण पुलिस अधिकारियों ने क्षेत्र को साफ करने के लिए कार्रवाई शुरू की।
इंटरनेशनाले द्वारा उद्धृत रॉयटर्स के एक समाचार पत्र के अनुसार, पुलिस ने एक घेरा बनाया और भीड़ को भगाने के लिए लाठियों का प्रयोग किया। वीडियो फुटेज में एक वरिष्ठ विपक्षी व्यक्ति को अधिकारियों द्वारा पकड़ा जाते हुए, पुलिस बस में जबरदस्ती चढ़ाया जाते हुए और अन्य प्रदर्शनकारियों को ढालों के सहारे पीछे धकेला जाते हुए देखा जा सकता है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस द्वारा आसपास की निगरानी जारी रहने के कारण सड़क दिन के अधिकांश समय बंद रही।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
विपक्षी दलों ने पुलिस की कार्रवाई को विरोध को दबाने की “अवैध” कोशिश के रूप में वर्णित किया। विपक्ष के नेता, जिनका नाम रिपोर्टों में उल्लेख नहीं किया गया, को बिना पूर्व चेतावनी के खींचा गया था। पार्टी के प्रवक्ताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने अत्यधिक बल का प्रयोग किया और भारतीय संविधान द्वारा गारंटीकृत शांतिपूर्ण सभा के अधिकार का उल्लंघन किया।
विपक्ष ने दिल्ली पुलिस के व्यवहार की जांच की मांग भी की और 2026 के आम चुनाव से पहले मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया में दावा किए गए अनियमितताओं को उद्धृत करते हुए चुनाव आयोग प्रमुख ग्यानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग की।
सरकार और पुलिस के बयान
दिल्ली पुलिस ने एक संक्षिप्त बयान जारी किया, जिसमें कहा गया कि यह अभियान कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए संचालित किया गया था और अधिकारियों ने मानक संचालन प्रक्रियाओं के अनुरूप कार्रवाई की थी। बयान में विपक्षी नेता को पुलिस वाहन में ले जाने की विशिष्ट घटना का उल्लेख नहीं किया गया।
उच्च स्तरीय सरकारी अधिकारियों ने, जब उनसे टिप्पणी करने के लिए कहा गया, दोहराया कि जब सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा हो, तो पुलिस को हस्तक्षेप करने का अधिकार प्राप्त है। विपक्ष द्वारा चुनाव आयोग के प्रमुख के इस्तीफे की मांग के संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई।
अंतर्राष्ट्रीय संदर्भ
यह घटना उस समय सामने आई है जब 2026 के आम चुनावों से पहले वैश्विक निगरानी एजेंसियां भारत के लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर नजर रखी हुई हैं। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्च आयुक्त कार्यालय ने पूर्व में सभी सदस्य देशों से शांतिपूर्ण सभा के अधिकार की रक्षा करने की अपील की है। हालांकि, कोई औपचारिक कूटनीतिक विरोध दर्ज नहीं किया गया है, लेकिन लंदन और वॉशिंगटन के विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना भारत के एक स्थिर लोकतंत्र के रूप में प्रतिष्ठा को प्रभावित कर सकती है।
यूरोपीय संघ के अधिकारियों ने भारत में “लोकतांत्रिक मानकों का सम्मान” करने की मांग की है, यह जोड़कर कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाब किसी भी प्रकार के बल प्रयोग की जांच की जानी चाहिए। संयुक्त राज्य अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने अपने वार्षिक मानवाधिकार रिपोर्ट में, भारत सहित कई देशों में राजनीतिक विपक्ष के साथ किए जाने वाले व्यवहार से संबंधित चिंताओं पर प्रकाश डाला है।
कानूनी और राजनीतिक प्रभाव
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि पुलिस की कार्रवाई भारतीय दंड संहिता की धारा 141, जो गैरकानूनी सभा से संबंधित है, और धारा 332, जो सार्वजनिक अधिकारी को उसके कर्तव्य से रोकने के उद्देश्य से जानबूझकर चोट पहुंचाने को संबोधित करती है, के तहत परखी जा सकती है। हालांकि, नेता को बस पर खींचे जाने की इस विशिष्ट घटना के संबंध में कोई प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) सार्वजनिक रूप से दर्ज नहीं की गई है।
विपक्षीय नेताओं ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने की योजना घोषित की है, जिसमें पुलिस के व्यवहार की न्यायिक जांच की मांग की गई है। वे मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम के तहत भी मुकदमा दर्ज करने की कोशिश करेंगे, यह तर्क देते हुए कि पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का उल्लंघन किया है।
सार्वजनिक प्रतिक्रिया
भारत में सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने इस घटना के वीडियो और फोटो पोस्ट किए, जिनमें से कई ने इसे “राज्य द्वारा भयभीत करने” के रूप में वर्णित करते हुए गुस्सा जताया। फुटेज के फैलने के कुछ घंटों तक ट्विटर और X पर #PoliceBrutality और #FreeOurLeaders जैसे हैशटैग ट्रेंड में रहे।
एम्नेस्टी इंटरनेशनल इंडिया सहित मानव अधिकार एनजीओ ने एक बयान जारी कर पुलिस के “अनुपातहीन बल प्रयोग” की निंदा की और स्वतंत्र जांच की मांग की।
प्राथमिक स्रोत एवं आधिकारिक दस्तावेज़
- India’s opposition leader dragged onto bus as police break up protest
- Modi-Shah’s Police Manhandling the Leader of the Opposition Cant Be Normalised – TheWire.i
- Police break up Indian opposition protest seeking resignation of election chief – Internaz
- Parliament street shuts down for much of the day; opposition parties step up protest again