न्यूयॉर्क — इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार को 2026 संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए इज़राइल के विरोधियों और कुछ सहयोगियों को “खतरनाक” और “अविश्वसनीय” करार दिया। उन्होंने ईरान के परमाणु संयंत्रों पर हमले का फैसला लेना अपने जीवन के “सबसे आसान निर्णयों” में से एक बताया, एक बयान जिसने कई सदस्य देशों की ओर से आलोचनाओं को जन्म दिया।
वैश्विक अलगाव के बीच नेतन्याहू का भाषण
नेतन्याहू के इन शब्दों का प्रकाश तब आया जब इज़राइल का गाज़ा में युद्ध जारी था और देश को बढ़ती कूटनीतिक दबाव का सामना करना पड़ रहा था। उन्होंने चेतावनी दी कि क्षेत्र में सशस्त्र समूहों के प्रति ईरान का समर्थन इज़राइल की सुरक्षा के लिए एक प्रत्यक्ष खतरा है और संयुक्त राज्य अमेरिका ने उस खतरे का मुकाबला करने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए हैं। प्रधानमंत्री ने यूरोपीय सहयोगियों की भी आलोचना की, जिन्हें उन्होंने एकता की कमी का आरोप लगाया, और तर्क दिया कि उनके सार्वजनिक बयान जमीनी स्तर पर उनके कार्यों से मेल नहीं खाते।
संभाषण के दौरान, नेतन्याहू ने गाज़ा में इज़राइल के सैन्य कार्यों पर प्रकाश डाला, यह उल्लेख करते हुए कि देश ने अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए “निर्णायक कदम” उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ईरानी लक्ष्यों पर हमले एक अस्थिर क्षेत्र में परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के लिए एक आवश्यक उपाय थे। भाषण का स्वर इज़राइल की सुरक्षा संबंधी चिंताओं की अत्यावश्यकता को रेखांकित करता था, जबकि इसने बल के प्रयोग पर व्यापक अंतर्राष्ट्रीय बहस को भी स्वीकार किया।
नेतन्याहू के टिप्पणियों पर महासभा से मिश्रित प्रतिक्रिया मिली। कई प्रतिनिधिमंडलों ने तनाव के तीव्र होने पर चिंता व्यक्त की और नवीन कूटनीतिक प्रयासों की अपेक्षा की। संयुक्त राष्ट्र महासचिव के कार्यालय ने एक बयान जारी कर सभी पक्षों से अपील की कि वे गाज़ा में संघर्ष का शांतिपूर्ण समाधान निकालें और ईरान के साथ रचनात्मक संवाद में शामिल हों।
उक्त भाषण के कुछ दिनों बाद, इज़राइली अधिकारियों ने दोहराया कि प्रधानमंत्री की टिप्पणियाँ देश की सुरक्षा प्राथमिकताओं का प्रतिबिंब हैं। इज़राइल के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी किया जिसमें कहा गया कि सरकार क्षेत्र में ईरान और अन्य शत्रुतापूर्ण तत्वों द्वारा उत्पन्न खतरों से निपटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय साझेदारों के साथ काम करना जारी रखेगी।
नेतन्याहू के भाषण ने घरेलू राजनीतिक संदर्भ को भी उजागर किया। उन्होंने उल्लेख किया कि उनके सरकार पर विपक्षी दलों की ओर से निगरानी बढ़ रही है और आगामी चुनाव उनकी नेतृत्व क्षमता की परीक्षा लेंगे। कुछ विश्लेषकों ने प्रधानमंत्री की टिप्पणियों को गजा संघर्ष के प्रबंधन पर बढ़ती आलोचना के बीच घरेलू समर्थन जुटाने की एक कोशिश के रूप में देखा।
अंतर्राष्ट्रीय प्रेक्षियों ने नोट किया है कि नेतन्याहू का यह भाषण ऐसे समय में आया है जब इज़राइल के कूटनीतिक संबंध तनाव में हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका ने मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बारे में चिंता व्यक्त की है, जबकि यूरोपीय देशों ने गजा में मानवीय विचारों को शामिल करने वाला एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की अपील की है। प्रधानमंत्री द्वारा सहयोगियों की आलोचना क्षेत्र में पश्चिमी शक्तियों की भूमिका पर चल रहे व्यापक विवाद का प्रतिबिंब है।
नेतन्याहू का यह बयान कि ईरान पर हमला करने का फैसला उन्होंने अब तक लिए गए “सबसे आसान निर्णयों” में से एक था, अल जज़ीरा, पीबीएस, एनबीसी न्यूज़ और केपीटीवी सहित कई मीडिया आउटलेट्स द्वारा रिपोर्ट किया गया। इस भाषण की रिकॉर्डिंग संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई, जहाँ इसे 190 से अधिक सदस्य देशों के प्रतिनिधियों द्वारा देखा गया।
प्राथमिक स्रोत एवं आधिकारिक दस्तावेज़
- Benjamin Netanyahu attacks Israel’s enemies and allies in UN speech
- WATCH: Israeli Prime Minister Netanyahu addresses 2026 UN General Assembly – PBS
- Israel’s Netanyahu takes the U.N. stage facing global isolation and a fight for his politi
- Israel’s Netanyahu says at UN that attacking Iran was ‘one of the easiest decisions’ he’s