न्यू यॉर्क — इंडोनेशिया के पीटलैंड में आग ने हाल के महीनों में तीव्रता बढ़ा ली है, जिससे जकार्ता और पड़ोसी देशों में विषाक्त धुंध ने वायु को घेर लिया है। सूखे की स्थिति, भूमि‑उपयोग नीति में अंतर और सीमित अग्निशमन संसाधनों के संयोजन से उत्पन्न यह आग, जलवायु परिवर्तन द्वारा वर्षा में परिवर्तन को बढ़ाने और पीटलैंड को तेज़ी से सूखाने के कारण बुझ
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
जाकार्ता की अर्थव्यवस्था को धुंध (हेज) के कारण गंभीर नुकसान हुआ है। शहर की पर्यटन बोर्ड के अनुसार, वर्ष 2026 के पहले तिमाही में पर्यटकों की संख्या में 12 प्रतिशत की गिरा दर्ज की गई, जबकि व्यवसायों ने कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण उत्पादकता में 3.5 प्रतिशत की हानि का उल्लेख किया है। धुंध के कारण सार्वजनिक भवनों में वायु फ़िल्ट्रेशन की लागत भी बढ़ गई है, जिसके लिए नगर पालिका प्रशासन ने वर्ष 2025 में अस्थायी फ़िल्ट्रेशन इकाइयों पर अनुमानित 2 मिलियन अमेरिकी डॉलर खर्च किए हैं।
नीतिगत कमी और प्रवर्तन
हालांकि इंडोनेशियाई सरकार ने कई प्रांतों में आपातकाल घोषित कर दिया है, लेकिन आग लगाने पर प्रतिबंध के प्रवर्तन में असमानता बनी हुई है। स्थानीय पुलिस इकाइयों को अवैध जलाव की पहचान करने के लिए अक्सर आवश्यक प्रशिक्षण नहीं मिलता है, और अपराधियों के खिलाफ दंड लगभग कभी लागू नहीं किए जाते हैं। बीबीसी की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि कृषि मंत्रालय ने अभी तक आग के जोखिम की मूल्यांकन प्रक्रिया को भूमि उपयोग योजनाओं में पूर्ण रूप से समाहित नहीं किया है, जिसके कारण विशाल क्षेत्रों में स्थित पीटलैंड्स (peatlands) संवेदनशील बने हुए हैं।
जलवायु परिवर्तन समस्या को तीव्र करता है
जलवायु मॉडल के अनुमान के अनुसार, सूखे मौसम में इंडोनेशियाई द्वीपसमूह में और भी शुष्क परिस्थितियां देखी जाएंगी, जिससे पीट आगों की संभावना बढ़ जाती है। ये आगें स्वयं कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) की बड़ी मात्रा को मुक्त करती हैं, जो वैश्विक तापमान वृद्धि में योगदान देती है और एक फीडबैक लूप (feedback loop) बनाती है जो पीटलैंड्स को और भी सूखा देती है। बीबीसी के वीडियो में दिखाया गया है कि धुंध हज़ारों किलोमीटर तक फैल सकती है, जिससे होंग कॉंग और टोक्यो जैसे दूरस्थ शहरों की वायु गुणवत्ता भी प्रभावित होती है।
भविष्य की दिशा
विशेषज्ञों का कहना है कि पीट आगों की आवृत्ति और तीव्रता को कम करने के लिए एक समन्वित दृष्टिकोण—जिसमें कठोर प्रवर्तन, फायर-ब्रेक (fire-break) बुनियादी ढांचे में निवेश और सामुदायिक शिक्षा का समावेश हो—अत्यंत आवश्यक है। इंडोनेशियाई सरकार ने 2028 तक अपनी आग बुझाने के बजट को दोगुना करने का वादा किया है, लेकिन कार्यान्वयन की गति यह तय करेगी कि धुंध पर नियंत्रण प्राप्त किया जा पाएगा या नहीं।