वॉशिंगटन — एलन मस्क ने रविवार को भारत में स्टारलिंक की अनुमोदन प्रक्रिया में देरी पर सवाल उठाया, जिसमें उन्होंने संकेत दिया कि रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी इस प्रक्रिया को प्रभावित कर रहे हैं। यह टिप्पणी तब आई जब सैटेलाइट-इंटरनेट उद्यम लॉन्च में रुकावट का सामना कर रहा है, वहीं घरेलू ब्रॉडबैंड प्रदाता जियो अपने 5जी और फाइबर नेटवर्क का विस्तार कर रहा है।
स्टारलिंक के भारतीय आवेदन की पृष्ठभूमि
स्पेसएक्स द्वारा संचालित लो-अर्थ-ऑर्बिट ब्रॉडबैंड सेवा स्टारलिंक ने जनवरी 2025 से भारत के संचार विभाग (DoT) से अनुमति मांगी है। कंपनी ने मार्च 2025 में एक औपचारिक आवेदन दायर किया था और देश के सैटेलाइट सेवाओं के लाइसेंसिंग प्रणाली के तहत अनुमति का इंतजार कर रही है। हाल ही में एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में, मस्क ने पूछा, “क्या अंबानी भारत के टेलीकॉम सेक्टर के असली बॉस हैं?” इस पोस्ट में स्पेसएक्स के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. अनिरुद्ध मल्पाणी के एक जवाब का हवाला दिया गया, जिसमें उन्होंने नियामक बाधाओं पर प्रकाश डाला था।
नियामक संदर्भ
भारत की टेलीकॉम नीति के तहत विदेशी सैटेलाइट ऑपरेटरों को यूनिफाइड लाइसेंस प्राप्त करना और राष्ट्रीय आवृत्ति आवंटन योजना (National Frequency Allocation Plan) का पालन करना अनिवार्य है। DoT ने स्पेक्ट्रम आवंटन, राष्ट्रीय सुरक्षा और घरेलू साझेदार की आवश्यकता को लेकर चिंताओं का हवाला दिया है। आलोचकों का तर्क है कि यह प्रक्रिया असमान रही है, जहां रिलायंस जियो जैसे घरेलू कंपनियों को 5जी रोल-आउट के लिए त्वरित अनुमोदन मिले हैं।
मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज, जियो प्लेटफॉर्म्स को नियंत्रित करती है, जो 45 करोड़ से अधिक ग्राहकों के साथ भारतीय ब्रॉडबैंड बाजार में हावी है। जियो की हाल ही में शुरू की गई 5जी-ओनली योजना और आक्रामक फाइबर विस्तार ने इसे सैटेलाइट ब्रॉडबैंड के लिए एक संभावित प्रतिस्पर्धी के रूप में स्थापित किया है, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में जहां भूमिगत (टेरेस्ट्रियल) बुनियादी ढांचा सीमित है।
विशेषज्ञ विश्लेषण
इंडिया टुडे ने टेलीकॉम विश्लेषकों के हवाले से कहा कि मस्क की टिप्पणियां एक व्यापक रणनीतिक गणना को दर्शाती हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि भारत में एक स्थान बनाने से स्टारलिंक को एक विशाल ग्राहक आधार मिल सकता है, लेकिन कंपनी को एक नियामक वातावरण से निपटना होगा जो ऐतिहासिक रूप से घरेलू खिलाड़ियों के पक्ष में रहा है। एक विश्लेषक ने यह भी देखा कि मस्क की टिप्पणी का समय जियो की नई कम-मूल्य ब्रॉडबैंड बंडल की घोषणा के साथ मेल खाता है, जो स्टारलिंक की कीमत निर्धारण मॉडल को प्रभावित कर सकती है।
CNBC ने रिपोर्ट किया कि स्पेसएक्स का उपग्रह नेटवर्क, जिसमें 4,000 से अधिक परिचालित उपग्रह शामिल हैं, भारत के मौजूदा ब्रॉडबैंड इकोसिस्टम को पूरक कर सकता है, जिससे बिना फाइबर के दूरस्थ गांवों तक पहुँच संभव हो सकती है। हालांकि, उसी रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस (DoT) ने स्टारलिंक के आवेदन पर अभी तक अंतिम निर्णय नहीं लिया है, और एजेंसी ने नवंबर 2026 के अंत में एक सुनवाई निर्धारित की है।
अंबानी का उत्तर
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने मस्क के X पोस्ट पर कोई प्रत्यक्ष बयान जारी नहीं किया है। इस महीने की शुरुआत में सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) के साथ दायर एक फाइलिंग में, कंपनी ने जियो के नेटवर्क का विस्तार करने और सभी नियामक आवश्यकताओं का पालन करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। इस फाइलिंग में स्टारलिंक मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं की गई।
बाजार पर प्रभाव
यदि स्टारलिंक को अनुमोदन मिल जाता है, तो यह ब्रॉडबैंड क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को जन्म दे सकता है, जिससे कीमतों में गिरावट और अविकसित क्षेत्रों में कवरेज का विस्तार संभव हो सकता है। इसके विपरीत, लंबी देरी जियो की प्रभुत्व को सुदृढ़ कर सकती है और उपभोक्ता विकल्पों को सीमित कर सकती है।
निवेशकों ने सतर्क प्रतिक्रिया दी है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर सोमवार को ₹2,845 पर बंद हुए, जो पिछले सत्र से 0.4 % ऊपर थे, जबकि स्पेसएक्स का निजी मूल्यांकन ब्लूमबर्ग के अनुमान के अनुसार $140 बिलियन पर अपरिवर्तित रहा।
आगे के कदम
डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस की आगामी सुनवाई में तकनीकी विनिर्देशों, स्पेक्ट्रम उपयोग और राष्ट्रीय सुरक्षा दिशानिर्देशों के अनुपालन की जाँच की जाएगी। दोनों, स्पेसएक्स और जियो, से विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत करने की अपेक्षा है। पर्यवेक्षक यह देखेंगे कि क्या नियामक वर्ष के अंत से पहले निर्णय की दिशा में कोई संकेत देता है।
प्राथमिक स्रोत एवं आधिकारिक दस्तावेज़
- Why Elon Musk is taking on India’s richest man over Starlink
- ‘Real boss of India?’: Elon Musk takes aim at Indian billionaire Ambani as Starlink launch
- The world’s richest man, Elon Musk questioned delays in India’s regulatory approval proces
- Is Elon Musk taking on Ambani to win Starlink race in India before Jio catches up? Experts