नई दिल्ली — मंगलवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने एक स्पष्टीकरण जारी करते हुए बताया कि 2027 के बोर्ड परीक्षाओं के लिए कक्षा 10 के किसी भी विषय में उत्तीर्ण होने के लिए 33 प्रतिशत कुल अंकों की आवश्यकता में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस बयान का उद्देश्य व्यापक अटकलों को दूर करना है, जो इस बात की पूर्व रिपोर्ट्स के बाद उठी थीं कि आंतरिक मूल्यांकन के भार (weightage) में संशोधन किया जा सकता है।
बोर्ड का स्पष्टीकरण
2 अक्टूबर 2026 को विद्यालयों को भेजे गए एक सर्कुलर में, सीबीएसई ने दोहराया कि किसी विद्यार्थी को उत्तीर्ण घोषित किए जाने के लिए, उसे उस विषय के लिए निर्धारित कुल अंकों में से कम से कम 33 प्रतिशत अंक प्राप्त करने होंगे, जिनमें आंतरिक मूल्यांकन और बाहरी बोर्ड परीक्षा दोनों शामिल हैं। बोर्ड ने कहा कि यह नियम सभी विषयों पर समान रूप से लागू होगा और आगामी 2027 की कक्षा 10 परीक्षाओं के लिए इसका उपयोग किया जाएगा।
गलतफहमी का स्रोत
सितंबर के पहले हफ्ते में, कई राज्य शिक्षा विभागों और निजी कोचिंग सेंटरों ने रिपोर्ट किया था कि सीबीएसई आंतरिक मूल्यांकन के अंकों के अनुपात में वृद्धि कर सकती है, जिससे प्रभावी पास अंक बदल सकते हैं। मीडिया आउटलेट्स ने इन रिपोर्ट्स को बढ़ावा दिया, जिससे विद्यार्थियों और अभिभावकों में उच्च अंक प्राप्त करने की आवश्यकता के संबंध में चिंताएं प्रकट हुईं।
सीबीएसई के स्पष्टीकरण में उल्लेख किया गया कि आंतरिक मूल्यांकन का घटक अब भी कुल विषय अंकों में से अधिकतम 20 प्रतिशत का भार रखता है, जबकि बाहरी परीक्षा शेष 80 प्रतिशत का हिस्सा है। इसलिए, 33 प्रतिशत की सीमा का अर्थ है कि 20 आंतरिक अंकों में से न्यूनतम 6.6 अंक और 80 बाहरी अंकों में से 26.4 अंक प्राप्त करने होंगे, जो मिलाकर 100 में से कुल 33 अंक बनेंगे।
आधिकारिक प्रतिक्रिया
बोर्ड के बयान में 2027 के लिए मूल्यांकन संरचना में किसी संशोधन का उल्लेख नहीं किया गया है। इसमें जोर दिया गया कि 2020 में प्रस्तुत किया गया मौजूदा ग्रेडिंग रूब्रिक (मूल्यांकन मानदंड) अभी भी प्रभावी है और विद्यालयों को निर्धारित आंतरिक मूल्यांकन दिशानिर्देशों का पालन जारी रखना चाहिए।
हितधारकों की प्रतिक्रियाएँ
देशभर के स्कूल प्रमुखों ने कहा कि वे छात्रों और अभिभावकों को सूचित करेंगे कि उत्तीर्ण मानदंडों में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (AICSE) ने उल्लेख किया कि यह स्पष्टीकरण मूल्यांकन प्रक्रिया में निरंतरता बनाए रखने में सहायक है।
दिल्ली और महाराष्ट्र में अभिभावक‑शिक्षक संघों ने राहत व्यक्त की, यह कहते हुए कि इस पुष्टि से वह अनिश्चितता समाप्त हो गई है जो अगले शैक्षणिक वर्ष के अध्ययन योजनाओं को प्रभावित कर सकती थी।
छात्रों पर प्रभाव
2027 की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र 33% के स्थापित मानदंड को लक्षित करना जारी रख सकते हैं। बोर्ड की पुनः पुष्टि का अर्थ यह भी है कि स्कूलों को नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले आंतरिक मूल्यांकन समय‑सारिणी या ग्रेडिंग रूब्रिक में बदलाव करने की आवश्यकता नहीं है।
33% नियम का पृष्ठभूमि
33% नियम 2020 में पेश किया गया था ताकि उच्च कक्षाओं में उन्नति के लिए आवश्यक न्यूनतम दक्षता स्तर को मानकीकृत किया जा सके। इस नियम के तहत, किसी भी विषय में सीमा से नीचे अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवार को उस विषय में असफल माना जाता है, चाहे अन्य विषयों में उनका प्रदर्शन कैसा भी हो।
इसके परिचय के बाद से, यह नियम समय‑समय पर बहस का विषय रहा है, जहाँ कुछ शिक्षकों का तर्क है कि यह उन विषयों में छात्रों पर अनावश्यक दबाव डालता है जहाँ वे पारंपरिक रूप से कम अंक प्राप्त करते हैं। फिर भी, CBSE ने यह सुनिश्चित किया है कि यह नियम सभी प्रमुख विषयों में दक्षता का एक आधारभूत स्तर स्थापित करता है।
प्राथमिक स्रोत एवं आधिकारिक दस्तावेज़
- CBSE clears Class 10 passing criteria confusion, says no change in 33% rule
- 33% overall to clear a subject, says CBSE; clears confusion over passing criteria – The In
- CBSE Clarifies: 33% overall marks still enough to pass a subject in Class 10 – Education T
- CBSE Class 10 Passing Criteria Unchanged: Students Need 33% Combined Marks – Jagranjosh.co